उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले लगातार सामने आने के बीच अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचने जा रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट और एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने फर्जी प्रमाणपत्रों की पूरी व्यवस्था की जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी की है। नेगी ने एससी-एसटी प्रमाणपत्रों में उपजाति जोड़कर प्रमाणपत्र जारी करने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गलत प्रमाणपत्रों के जरिए अपात्र लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, नीट यूजी दाखिलों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के कथित फर्जी प्रमाणपत्र का मामला सामने आने के बाद चार दाखिले निरस्त किए गए हैं और चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। फर्जी प्रमाणपत्रों का मुद्दा एक बार फिर नीट यूजी दाखिलों के साथ सामने आया है। उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के माध्यम से एमबीबीएस दाखिलों के लिए काउंसिलिंग चल रही है। इसी दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिले का मामला सामने आया। जांच के बाद चार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और उनके एमबीबीएस दाखिले भी रद्द कर दिए गए। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वही SC/ST के भी कई प्रमाणपत्र सन्देह के घेरे में हैं जिनको सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है। विकेश सिंह नेगी ने कहा कि वह जनहित याचिका के जरिये हाईकोर्ट में माँग करेंगे कि राज्य गठन से अब तक के प्रमाण पत्रों की उच्चस्तरीय जांच हो आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले को वह लंबे समय से उठा रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जिलाधिकारी और समाज कल्याण विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। नेगी का आरोप है कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। नीट यूजी मामले की जांच में सामने आया कि चारों अभ्यर्थियों ने एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया था। जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सत्यापन के दौरान आवेदन में दिए गए पते पर भी अभ्यर्थी या उनके परिजन नहीं मिले। शपथपत्र और अन्य दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां सामने आईं। विकेश सिंह नेगी ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर नौकरी व एडमिशन के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा ले रहे हैं तो वहीं उन्हें आशंका है कि फर्जी प्रमाण पत्र में किसी बड़े गिरोह व सरकारी तंत्र की मिलीभगत है। जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी विकेश सिंह नेगी ने एससी-एसटी प्रमाणपत्रों में उपजाति जोड़कर प्रमाणपत्र जारी किए जाने और क्षेत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने के मामलों की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले पूरे तंत्र की जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। इधर, जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों एमबीबीएस दाखिले रद्द कर दिए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में आरक्षित श्रेणी और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों को जिला प्रशासन से सत्यापन के बाद ही स्थायी करने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं

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