एकता विहार धरना स्थल पर अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दे रहे बेरोजगार डिग्रीधारी मेडिकल लैब तकनीशियनों के आंदोलन को आज 100 दिन पूरे हो गए। इस अवसर पर बेरोजगार लैब तकनीशियनों ने सरकार पर उनकी मांगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के मेडिकल लैब तकनीशियन पिछले 26 वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि कोरोना और डेंगू जैसी महामारी के दौरान मेडिकल लैब तकनीशियनों ने स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया, इसके बावजूद सरकार ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने फ्री डायग्नोस्टिक सेवा के नाम पर सरकारी लैबों को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया है, जबकि मेडिकल लैब तकनीशियनों की सेवा नियमावली आज तक नहीं बनाई गई है। इसके कारण प्रतिवर्ष सैकड़ों अभ्यर्थी लाखों रुपये की फीस खर्च करने के बावजूद बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं। संगठन ने वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेजों में हुई भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लिखित परीक्षा के नाम पर ऑनलाइन लिंक के माध्यम से धांधली की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि दो बार मुख्यमंत्री आवास कूच के बाद 11 अगस्त को मुख्यमंत्री से हुई वार्ता में उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी चार सूत्रीय मांगों पर शीघ्र अमल नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष आशीष चंद्र, महासचिव मयंक राणा, उपाध्यक्ष रणवीर बिष्ट, कुलभूषण गुसाईं, प्रदीप जोशी, विनोद थपलियाल, शरद पाल, कवीर पोखरिया, संजय जोशी, सिद्धार्थ कुकरेती, प्रीति, हिमांशी, प्रियंका, नवनीत थपलियाल, यमुनेश खंडूरी, परमात्मा पैनियुली, दीपक राज जगवान सहित संगठन के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

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