तेज रफ्तार जिंदगी में जहां तनाव, मानसिक थकावट और सामाजिक जुड़ाव की कमी लगातार बढ़ रही है, वहीं खुशी और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी हो गया है। 2024 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में भारत का 146 देशों में से 126वां स्थान इस बात का संकेत है कि खुशी केवल एक निजी भावना नहीं, बल्कि एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, UPES ने पहली बार हैप्पीनेस डे’ मनाया, जो पूरे कैंपस में सकारात्मकता फैलाने और भावनात्मक सेहत के लिए एक खास पहल थी।

इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ को एक साथ लाकर सकारात्मक ऊर्जा और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देना था। खास बात यह रही कि इस पहले संस्करण का आयोजन बैच 2025 के फ्रेशर्स के स्वागत के साथ हुआ जिससे यह दिन नए छात्रों के लिए न सिर्फ एक परिचय का पल, बल्कि एक यादगार और भावनात्मक शुरुआत बन गया। यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसा मौका था जब पूरी UPES फैमिली ने एक साथ मिलकर क्लासरूम और ऑफिस से परे, आपसी जुड़ाव की एक गहरी संस्कृति को महसूस किया।

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खुशियों से भरे इस दिन में हल्के-फुल्के खेल, ओपन-एयर एक्टिविटीज, सामूहिक भोजन और खुलकर हुई बातचीतों ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। यह एक ऐसा पल था जहां सबने मिलकर रुककर मुस्कुराना सीखा और फिर से जुड़ने का मौका मिला।

इस दिन की सबसे खास बात थी एक विशाल डांस गैदरिंग, जिसमें पूरा UPES समुदाय बिना झिझक और पूरे उत्साह के साथ शामिल हुआ। 9,000 से अधिक छात्र, फैकल्टी और स्टाफ एक साथ झूमते और मस्ती करते नज़र आए जो किसी भारतीय यूनिवर्सिटी में अब तक के सबसे बड़े फ्लैश मॉब्स में से एक माना जा सकता है। भले ही इसे औपचारिक रूप से रिकॉर्ड के लिए दर्ज नहीं किया गया, लेकिन यह पल खुशी के सामूहिक उत्सव का एक शक्तिशाली और प्रतीकात्मक उदाहरण बन गया।

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इस अवसर पर UPES के वाइस चांसलर, डॉ. राम शर्मा ने विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा:

“यह दिन एकता, आभार और एक परिवार का हिस्सा होने की खुशी को मनाने के लिए समर्पित है। UPES में हम मानते हैं कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान, स्किल्स और करियर की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को और अधिक खुशहाल, स्वस्थ और संतुलित बनाने का जरिया भी होनी चाहिए। एक सच्ची परिवर्तनकारी शिक्षा वही है जो छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ सभी के समग्र कल्याण में योगदान दे। आइए इस दिन को एक ऐसा उत्सव बनाएं जो हमें एकजुट करे और एक खुशहाल लर्निंग वातावरण बनाने की हमारी साझी प्रतिबद्धता को मजबूत करे।”

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दिन का समापन कैंपस में लगे फूड स्टॉल्स, संगीत और हल्की-फुल्की बातचीत के साथ हुआ। यह सिर्फ मस्ती का दिन नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक ब्रेक की तरह था जिसने सभी को यह पाद दिलाया कि यूनिवर्सिटी सिर्फ सीखने की जगह नहीं, बल्कि अच्छे से जीने की जगह भी हो सकती है

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