राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी की अध्यक्षता में आज “मातृ रेफरल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट सिस्टम” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मातृ रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, रेफरल से पूर्व गर्भवती महिलाओं के उचित स्थिरीकरण (Stabilization), रेफर करने एवं प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं के मध्य प्रभावी संवाद व्यवस्था, रेफरल प्रलेखन तथा प्रत्येक रेफर की गई मातृ केस की निगरानी एवं ऑडिट व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त तकनीकी सुझावों को सम्मिलित करते हुए SOP को शीघ्र ही राज्य की सभी प्रसव सेवाएं प्रदान करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं, पीएचसी टाइप-बी से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक, लागू किया जाएगा।

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बैठक में डॉ. अजय आर्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा; डॉ. रश्मि पंत, निदेशक एनएचएम उत्तराखंड; डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम; डॉ. मनोज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून; डॉ. मनु जैन, पीएमएस, जिला चिकित्सालय देहरादून; डॉ. जया चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एम्स ऋषिकेश; डॉ. गीता जैन, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज; डॉ. वंदना, विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज; डॉ. शालिनी, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय देहरादून; डॉ. अमलेश; डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक (मातृ स्वास्थ्य), एनएचएम उत्तराखंड तथा डॉ. नितिन अरोड़ा, वरिष्ठ परामर्शदाता (मातृ स्वास्थ्य), एनएचएम उत्तराखंड उपस्थित रहे।

प्रस्तावित SOP के अंतर्गत रेफर की जाने वाली प्रत्येक मातृ केस के लिए Advance Communication System को अनिवार्य किया जाएगा, जिसके तहत रेफरल से पूर्व उच्च संस्थान को सूचना देकर आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएंगी। साथ ही प्रत्येक रेफर की गई मातृ केस का व्यवस्थित ट्रैकिंग एवं ऑडिट किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, मानव संसाधनों, अवसंरचना एवं रेफरल प्रबंधन से संबंधित कमियों की पहचान कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

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इस अवसर पर मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक प्रभावी एवं उत्तरदायी रेफरल प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त सुझावों को SOP में सम्मिलित करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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यह पहल स्वास्थ्य संस्थानों के मध्य समन्वय को मजबूत करने, आपातकालीन प्रसूति सेवाओं तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने, रेफरल में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करने तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही रेफरल ऑडिट के माध्यम से स्वास्थ्य प्रणाली में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे, जिससे मातृ मृत्यु एवं गंभीर जटिलताओं की रोकथाम में सहायता मिलेगी।

बैठक के अंत में विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त सुझावों के आधार पर SOP तैयार किए जाने हेतु निर्णय लिया गया

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