हल्द्वानी में 8 फरवरी को हुई हिंसा के बाद से अब्दुल मलिक फरार है। 6 लोगों की जान लेने वाली हिंसा और आगजनी के लिए पुलिस अब्दुल मलिक को ही मुख्य आरोपी बता रही है। हल्द्वानी के वनभूलपुरा में एक कथित मदरसा और नमाज स्थल को तोड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया था। इसमें 300 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। पुलिस का दावा है कि अब्दुल मलिक ने ही नगर निगम की कार्रवाई का सबसे अधिक विरोध किया था और उसकी आवाज पर ही लोग गलियों से निकलकर हमला करने लगे। अब्दुल इस मदरसे और नमाज स्थल पर अपने मालिकाना हक का दावा करता था, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह नजूल भूमि (जिस पर किसी का मालिकाना हक ना हो) पर बना हुआ था। हिंसा के बाद से कभी पश्चिमी यूपी तो कभी दिल्ली में छिपता फिर रहा अब्दुल मलिक वनभूलपुरा और हल्द्वानी में काफी दबदबा रखता है। वह रोड और रेलवे का ठेकेदार है और करोड़ों की दौलत का मालिक है। हालांकि, कभी उसके परिवार की माली स्थिति बेहद खराब थी। अब मलिक का परिवार बेहद संपन्न है और इलाके के दूसरे मुस्लिम परिवारों की मदद की वजह से उनका काफी प्रभाव है।

मलिक ने 2004 में आजमाया था राजनीति में हाथ

बंजारा परिवार से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल मलिक का रसूख किसी से छिपा नहीं है। इसे पहचान विरासत में मिली। बाहुबल व धनबल के दम पर मलिक सियासत करने उतरा और फरीदाबाद सीट से 2004 में लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा। अब यह बनभूलपुरा उपद्रव प्रकरण का साजिशकर्ता है। हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अब्दुल मलिक के दादा आजादी से पहले आकर बसे। दादा और पिता दोनों ने गांव-गांव जाकर गेहूं व चावल खरीदना शुरू किया। कम दाम पर अनाज खरीदकर उचित दामों पर बेचा जाता था। बंजारा परिवार में अब्दुल मलिक पांच भाइयों में सबसे छोटा है। इसकी पैदाइश बनभूलपुरा की है। इसे पहचान विरासत में मिली। वहीं 1960 में मलिक के ताऊ अब्दुल्ला हल्द्वानी के पालिकाध्यक्ष रहे चुके हैं। उन्हीं के नाम से बरेली रोड पर अब्दुल्ला बिल्डिंग है। मलिक ने हर काम में हाथ आजमाया। मलिक ने वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा के फरीदाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। उसे 71,459 वोट मिले मगर चुनाव हार गया। मलिक की वापसी फिर हल्द्वानी में हुई। अब्दुल मलिक बनभूलपुरा के मुस्लिम समुदाय में बड़ा नाम है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में मलिक की पत्नी के वकील अहरार बेग के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल जब वनभूलपुरा में 4000 परिवारों को ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया गया था तब भी अब्दुल मलिक बेहद सक्रिय था। मलिक ने उस दौरान कई लोगों को कानूनी मदद दिलाई थी। उसने कई लोगों को लिए कानूनी लड़ाई का खर्च उठाया था। पिछले साल जनवरी में हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास कथित तौर पर अवैध तरीके से बसे इन परिवारों को जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था। ध्वस्तीकरण का आदेश निकलने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर धरने पर बैठ गईं थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया था और हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया था।
घोड़ों के कारोबार से सरकारी ठेकेदारी तक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मलिक ठेकेदारी करता है। वह सरकारी प्रॉजेक्ट्स की भी ठेकेदारी लगता है। पहले उसका परिवार कभी खानाबदोश था। परिवार के लोग घोड़ों का व्यापार करते थे। जब अंग्रेज हल्द्वानी आए तो उन्हें सामानों को ढोने के लिए इन घोड़ों की जरूरत पड़ी। इस तरह परिवार अंग्रेजों के संपर्क में आया। बाद में लकड़ी के कारोबार से उनकी कमाई हुई।

कभी था पोंटी चड्डा का पार्टनर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शराब कारोबारी पोंटी चड्डा ने गोला में जब खनन का काम किया था तब उसका पार्टनर अब्दुल मलिक भी बना था। काम को उसी ने संभाला लेकिन पार्टनरशिप ज्यादा दिन नहीं चली।

कमिशनर ने शुरू की वनभूलपुरा प्रकरण की जांच
वनभूलपुरा में आठ फरवरी को हुई हिंसक घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए उत्तराखंड शासन ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को 10 फरवरी को जांच अधिकारी नामित किया गया था। इसी क्रम में आयुक्त दीपक रावत ने बुधवार को बताया कि किसी व्यक्ति को वनभूलपुरा में हुई घटना से संबंधित कोई भी तथ्य, साक्ष्य, बयान दर्ज कराने हों तो वह एक सप्ताह के भीतर आयुक्त कुमाऊं मंडल नैनीताल कैंप कार्यालय हल्द्वानी में सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक उपस्थित हो सकता है।

अब्दुल मलिक की संपत्ति कुर्क होगी

हल्द्वानी हिंसा के नामजद मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक, उसके बेटे सहित नौ उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश हल्द्वानी सिविल कोर्ट ने जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों पर सीआरपीसी की धारा 82, 83 के तहत करवाई की अनुमति दे दी है। पुलिस ने कोर्ट में आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के लिए आवेदन किया था। 8 फरवरी को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। इसमें 18 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें से पुलिस अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक, उसका बड़ा बेटा अब्दुल मोईद और निवर्तमान पार्षद शकील अंसारी सहित तमाम लोग फरार हैं। मंगलवार को सिविल कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे। आज पुलिस दोबारा कोर्ट पहुंची और इन 9 आरोपियों की रिपोर्ट भी पेश की। पुलिस ने इन उपद्रवियों के खिलाफ धारा 83 की तहत कार्रवाई करने की मांग की। कोर्ट ने इसके बाद अब्दुल मलिक, उनके बेटे अब्दुल मोईद, निवर्तमान पार्षद शकील अंसारी, वसीम उर्फ हप्पा, मोकिन सैफी, एजाज अहमद, तस्लीम, जियाउल रहमान और रईस उर्फ दत्तू की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए। पुलिस ने इन सभी की धरपकड़ के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस इनकी लोकेशन खंगालने के साथ-साथ गिरफ्तारी के लिए भी उनके परिचितों, रिश्तेदारों के घरों में दबिश दे रही है

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