मुख्य अतिथि व शिक्षाविद् डॉ प्रशांत सिंह डिपार्टमेंट ऑफ़ केमिस्ट्री, डी. ए. वी. पीजी कॉलेज, देहरादून, द्वारा छात्रों को सतत विकास के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की डॉक्टर सिंह ने सतत विकास के अर्थ से प्रारंभ करते हुए सतत विकास के लिए पर्यावरण का महत्व के साथ एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का ध्यान रखना, किस प्रकार प्रति व्यक्ति इसमें अपना सहयोग दे सकता है! सतत विकास के तीन पिलर पर उन्होंने प्रकाश डाला। पहला ,सामाजिक संरचना जिसमें समाज के सभी वर्गों के आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार, शिक्षा स्वास्थ्य और समाज में समरसता को बढ़ावा देने के उपाय, गरीबी को कम करने और बेरोजगारी का समाधान करने के उपाय, जाति लिंग और धर्म के आधार पर भेदभाव हटाने का प्रयास,दूसरा है आर्थिक स्थिरता, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के लिए उपाय उद्योग रोजगार के स्रोत और विकास और वित्तीय स्थिति को सुधारने के उपाय, लोगों के आए को बढ़ाने के प्रयास आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने और गरीबों को कम करने के उपायों पर बल दिया तीसरा और महत्वपूर्ण पिलर पर्यावरण संरक्षण और गुणवत्ता के उपाय। प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाव, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय प्रदूषण कम करने और ऊर्जा संरक्षण के उपाय, इन तीनों पिलरों का संतुलन सतत विकास का मूल आधार है डॉक्टर सिंह ने आगे कहा कि आज आवश्यकता है कि हम सभी सतत विकास के प्रति समर्पित रहे और इस दिशा में योगदान करें ताकि आने वाले समय में समृद्धि और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रख सके और एक खुशहाल भविष्य के लिए तैयार हो सकें

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