भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के सभी निकाय उम्मीदवारों की घोषणा अगले दो तीन हो जाएगी। उन्होंने कहा, चूंकि भाजपा उम्मीदवार जीत की गारंटी है, इसलिए यहां नाम भी अधिक हैं और विचार विमर्श विस्तृत तरीके से किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस पर पलटवार किया कि उनके पास तो उम्मीदवारों का ही टोटा पड़ा है, कई सीटों पर उनके पास सर्वसमाज के नाम तक नहीं हैं अन्यथा वे आरक्षण निर्धारण का रोना नहीं रोते।

प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर सिंह चौहान ने जानकारी दी कि पार्टी मुख्यालय में आज पर्यवेक्षकों के साथ चर्चा के दूसरे दिन आज गढ़वाल मंडल के जनपदों के निकाय प्रत्याशियों पर चर्चा हुई। जिसमें देहरादून महानगर, देहरादून ग्रामीण, हरिद्वार, रुड़की, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, कोटद्वार के सभी नगर निगम, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष के शीर्ष 3 नामों का पैनल तैयार किया गया। इस दो दिवसीय बैठक में सामने आए नामों के पैनल पर अगले दो दिन में प्रदेश चुनाव प्रबंध समिति में चर्चा की जाएगी। जिसके बाद निगम महापौर नामों के पैनल को केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के उपरांत ही घोषणा की जाएगी।

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इस दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्री भट्ट ने स्पष्ट किया कि अगले दो तीन दिन में सभी निकाय उम्मीदवारों के नाम सामने आ जाएंगे। साथ ही कहा, चूंकि भाजपा का उम्मीदवार बनना जीत की गारंटी है, लिहाजा दावेदारों की सूची भी बहुत लंबी है। वहीं आरक्षण को लेकर माहरा के आरोप पर पलटवार किया कि सच्चाई यह है उनके पास तो सभी सीटों पर सर्वसमाज के कार्यकर्ताओं का भी आभाव है, तभी वह आरक्षण निर्धारण का रोना रो रहे हैं । जबकि पहली बार 1 हजार से अधिक आपत्तियों पर विचार कर आरक्षण निर्धारण में समुचित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। दरअसल कांग्रेस को अपनी हार स्पष्ट दिखाई दे रही है और उनके नेता चुनाव में उतरने से डर रहे हैं।

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वहीं पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश महामंत्री श्री आदित्य कोठारी ने कांग्रेसी बयानबाजियों पर तंज किया कि हमारे पास तो कई सीटों के लिए तो दो दर्जन से भी अधिक दावेदार हैं। लेकिन कांग्रेस के पास तो उम्मीदवारों का ही टोटा हो गया है, कई निकाय सीटों पर तो उनको उम्मीदवार ढूंढे नहीं मिल रहा है। चूंकि भाजपा में उम्मीदवार चयन की निश्चित प्रक्रिया है, जिसका पालन किया जा रहा है। अब चूंकि अधिकांश व्यक्ति जीतने के लिए चुनाव लड़ता है, लिहाजा भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ लगना लाजिमी है। लेकिन कांग्रेस में तो गुटबाजी ही टिकट कब्जाने की प्रक्रिया है, इसलिए उनके कार्यकर्ता अपने अपने आकाओं के चक्कर लगा रहे हैं

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