सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश, फर्स्ट रिस्पॉन्डर ट्रेनिंग, गुड सेमेरिटन एवं हिट एंड रन कानून पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण
स्कूली बच्चों की सुरक्षित एवं जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) एवं सड़क सुरक्षा, देहरादून के निर्देशन में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईडीटीआर), देहरादून में रविवार को 70 स्कूल बस चालक एवं सहायकों के लिए सड़क सुरक्षा, सुरक्षित वाहन संचालन, आपदा प्रबंधन एवं प्राथमिक उपचार विषयक एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल बस चालकों एवं सहायकों को केवल सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति जागरूक करना ही नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना अथवा किसी भी आपातकालीन स्थिति में बच्चों एवं घायलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, त्वरित निर्णय लेने तथा प्रभावी प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए व्यवहारिक रूप से प्रशिक्षित करना भी था।
स्वास्थ्य परीक्षण के साथ दिया गया फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इसके उपरांत इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (इंडिया चैप्टर) के वरिष्ठ ट्रॉमा केयर विशेषज्ञ हर्ष पारीक ने प्रतिभागियों को फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने दुर्घटना के बाद के ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व, घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने, एम्बुलेंस सेवा से समन्वय स्थापित करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों एवं सुरक्षित स्कूल परिवहन पर विशेष प्रशिक्षण
आईडीटीआर के प्रशिक्षकों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित स्कूल बस सुरक्षा दिशा-निर्देशों, सुरक्षित एवं रक्षात्मक (Defensive) ड्राइविंग, वाहन अनुरक्षण, विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्कूल बस संचालन के मानकों, मोटर वाहन अधिनियम, सड़क सुरक्षा नियमों तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
“बच्चों की सुरक्षा चालक एवं सहायक की सर्वोच्च जिम्मेदारी”
— डॉ. अनीता चमोला, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) एवं सड़क सुरक्षा, देहरादून
अपने संबोधन में डॉ. अनीता चमोला ने कहा कि विद्यालयी वाहन चालक एवं सहायक केवल वाहन संचालक नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के प्रथम एवं सबसे महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। प्रत्येक चालक एवं सहायक का तकनीकी रूप से दक्ष, अनुशासित तथा संवेदनशील होना आवश्यक है, ताकि प्रत्येक बच्चा प्रतिदिन सुरक्षित रूप से विद्यालय पहुँचे और सकुशल अपने घर लौट सके।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक चालक की सामाजिक, नैतिक एवं मानवीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने प्रतिभागियों को गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) कानून की जानकारी देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में बिना किसी कानूनी भय के घायल व्यक्ति की सहायता करना प्रत्येक जागरूक नागरिक का दायित्व है। दुर्घटना के बाद का ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान दिया गया समय पर प्राथमिक उपचार अनेक लोगों का जीवन बचा सकता है।
डॉ. चमोला ने हिट एंड रन (Hit & Run) मामलों पर विशेष बल देते हुए कहा कि दुर्घटना के बाद घटनास्थल से भाग जाना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। प्रत्येक चालक का दायित्व है कि दुर्घटना होने पर तत्काल पुलिस एवं एम्बुलेंस को सूचना दे, घायल व्यक्ति की यथासंभव सहायता करे तथा कानून के अनुरूप अपना उत्तरदायित्व निभाए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षित परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा समाज में जिम्मेदार एवं संवेदनशील चालक तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हर माह आयोजित किए जा रहे हैं विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
डॉ. अनीता चमोला ने बताया कि संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) एवं सड़क सुरक्षा, देहरादून द्वारा आईडीटीआर के सहयोग से प्रत्येक माह स्कूल बस चालकों एवं सहायकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यालयी परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, अनुशासित एवं उत्तरदायी बनाना है।
उन्होंने बताया कि पिछले माह 46 स्कूल बस चालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया था, जबकि इस माह 70 चालक एवं सहायकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार अब तक कुल 116 स्कूल बस चालक एवं सहायकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। आगामी महीनों में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा, ताकि देहरादून संभाग के सभी विद्यालयी परिवहन कर्मियों को चरणबद्ध रूप से प्रशिक्षित कर सड़क सुरक्षा के उच्चतम मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
“प्रशिक्षण से ही बनेगी सुरक्षित एवं जिम्मेदार स्कूल परिवहन व्यवस्था”
— श्री रोहित कुमार शर्मा, उप निदेशक, आईडीटीआर
उप निदेशक, आईडीटीआर श्री रोहित कुमार शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल वाहन संचालन की तकनीक सिखाना नहीं, बल्कि चालक एवं सहायकों में अनुशासन, जिम्मेदारी, व्यावसायिक दक्षता तथा सड़क सुरक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि विद्यालयी परिवहन अत्यंत उत्तरदायित्वपूर्ण सेवा है और इससे जुड़े प्रत्येक चालक एवं सहायक को नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षित ड्राइविंग, वाहन अनुरक्षण तथा आपातकालीन परिस्थितियों में उचित एवं त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए निरंतर प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है।
अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में उप निदेशक, आईडीटीआर श्री रोहित कुमार शर्मा, परिवहन कर अधिकारी सुश्री प्रज्ञा पंत, आईडीटीआर के प्रशिक्षकों एवं अन्य अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता व्यक्त की।
सुरक्षित चालक • सुरक्षित विद्यार्थी • सुरक्षित विद्यालय • सुरक्षित उत्तराखण्ड
विद्यालयी परिवहन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिवहन विभाग द्वारा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि प्रत्येक स्कूल बस चालक एवं सहायक सड़क सुरक्षा के मानकों, आपातकालीन प्रबंधन एवं मानवीय दायित्वों के प्रति पूर्णतः जागरूक एवं प्रशिक्षित रह सके। इससे प्रदेश में सुरक्षित, जिम्मेदार एवं दुर्घटनामुक्त विद्यालयी परिवहन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा
