उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत के भांजे और युवा उद्यमी विक्रम राणा ने भूमि धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि नैनीताल हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पुलिस प्रशासन अब तक प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है

विक्रम राणा ने बताया कि मसूरी रोड स्थित पुरकुल गांव की भूमि से जुड़े मामले में उनके साथ 19 करोड़ 81 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राजपुर थाने में 14 सितंबर 2025 को आईपीसी की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में राजकुमार यादव सहित कई लोगों को नामजद किया गया है

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उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि खरीद के लिए पूरी राशि का भुगतान किए जाने के बावजूद उनके पक्ष में जमीन का बैनामा नहीं किया गया। मामले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई और तीन जून को न्यायालय ने अपना आदेश पारित किया, लेकिन इसके बाद भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई
प्रेसवार्ता में विक्रम राणा ने कहा कि न्याय मिलने की उम्मीद में उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पोर्टल तक पर गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि यदि आम नागरिकों और उद्यमियों को न्यायालय के आदेश के बाद भी न्याय नहीं मिल पाता है तो यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है
उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह आगे कानूनी लड़ाई के साथ जनस्तर पर भी अपनी आवाज उठाएंगे।
प्रेसवार्ता के दौरान विक्रम राणा ने कहा कि यह मामला केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में आम लोगों के भरोसे का भी प्रश्न है

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