पर्यावरण और परंपरा के संयोजन का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया पर्यावरण संरक्षण को मिला सांस्कृतिक आधार
उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने और पर्यावरण संरक्षण को जनसरोकार से जोड़ने की दिशा में संस्कृति साहित्य कला परिषद की उपाध्यक्ष एवं दर्जाधारी मंत्री मधु भट्ट ने हरेला हरियाली महोत्सव को इस वर्ष दिल्ली में भी प्रभावशाली तरीके से मनाया।
एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ मिलकर पौधारोपण कर पर्यावरण और परंपरा के संयोजन का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। इस मौके पर उनकी माताजी भी साथ में थी । इस मौके पर उन्होंने कहा कि एक पेड़ मां के साथ भी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-संवेदनशील संदेश और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा को भी जमीन पर उतारते हुए, विविध स्थानों पर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया गया।

ये भी पढ़ें:  राजधानी में आज रात एयर रेड- ब्लैकआउट मॉक ड्रिल, 30 मिनट रहेगा अंधेरा

दिल्ली के प्रतिष्ठित नव भारतीय पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ रुद्राक्ष, बेलपत्र, आंवला जैसे फलदार और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम ने न केवल बच्चों में पर्यावरण चेतना को प्रबल किया, बल्कि उत्तराखंड की जैव-सांस्कृतिक विरासत को दिल्ली के शहरी परिवेश से भी जोड़ा।

ये भी पढ़ें:  मुख्यमंत्री धामी के चेहरे पर लड़ा जाएगा 2027 का चुनाव

हरेला त्योहार नहीं, प्रकृति के साथ पुनः जुड़ने का उत्सव है इस अवसर पर अमर संदेश से श्रीमती मधु भट्ट ने कहा “हरेला पर्व हमें यह सिखाता है कि पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन नहीं, हमारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों की सांस हैं। इसे केवल उत्तराखंड तक सीमित न रखकर पूरे भारत में फैलाना हमारा कर्तव्य है।”

दिल्ली दौरे के बावजूद उन्होंने प्रदेश की लोकसंस्कृति को प्राथमिकता दी और हरेला महोत्सव को राजधानी में भी जन-उत्सव का रूप दिया। उनका यह प्रयास दिखाता है कि जब जनप्रतिनिधि संकल्प के साथ काम करता है तो सीमाएं नहीं, सेतु बनते हैं।

ये भी पढ़ें:  प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 14 ग्रामों के समग्र विकास पर जोर

मधु भट्ट की सोच और कार्यशैली यह स्पष्ट करती है कि राजनीति केवल सत्ता नहीं, संवेदनशीलता और संस्कृति के संरक्षण का माध्यम भी हो सकती है।

उत्तराखंड और देश को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो विकास के साथ-साथ पर्यावरण और परंपरा की रक्षा करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *